मौक़ा पाते ही वार करते हैं
लोग जो यार यार करते हैं
क्या है नफ़रत हमें नहीं मालूम
हम तो बस सब सेे प्यार करते हैं
वक़्त आने पे तेरा कल लेंगे
आज तुझ पे उधार करते हैं
वो कभी लौट कर नहीं आता
जिस का हम इंतिज़ार करते हैं
डूबने वाले सोचते होंगे
सब नदी कैसे पार करते हैं
मुफ़लिसी में ग़रीब के बच्चे
जाने क्या क्या विचार करते हैं
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