ग़लत निकले सब अंदाज़े हमारे
कि दिन आए नहीं अच्छे हमारे
सफ़र से बाज़ रहने को कहा हैं
किसी ने खोल के तस्में हमारे
हर इक मौसम बहुत अंदर तक आया
खुले रहते थे दरवाज़े हमारे
उस अब्र-ए-मेहरबाँ से क्या शिकायत
अगर बर्तन नहीं भरते हमारे
— Tehzeeb Hafi
कि दिन आए नहीं अच्छे हमारे
सफ़र से बाज़ रहने को कहा हैं
किसी ने खोल के तस्में हमारे
हर इक मौसम बहुत अंदर तक आया
खुले रहते थे दरवाज़े हमारे
उस अब्र-ए-मेहरबाँ से क्या शिकायत
अगर बर्तन नहीं भरते हमारे
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