jo tere saath rahte hue sogwaar ho | जो तेरे साथ रहते हुए सोगवार हो

  - Tehzeeb Hafi

जो तेरे साथ रहते हुए सोगवार हो
लानत हो ऐसे शख़्स पे और बेशुमार हो

अब इतनी देर भी ना लगा, ये हो ना कहीं
तू आ चुका हो और तेरा इंतिज़ार हो

मैं फूल हूँ तो फिर तेरे बालो में क्यूँ नहीं हूँ
तू तीर है तो मेरे कलेजे के पार हो

एक आस्तीन चढ़ाने की आदत को छोड़ कर
‘हाफ़ी’ तुम आदमी तो बहुत शानदार हो

कब तक किसी से कोई मोहब्बत से पेश आएं
उसको मेरे रवय्ये पर दुख है तो यार हो

  - Tehzeeb Hafi

Teer Shayari

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