kya khabar us raushni men aur kya kya roshan hua | क्या ख़बर उस रौशनी में और क्या क्या रोशन हुआ

  - Tehzeeb Hafi

क्या ख़बर उस रौशनी में और क्या क्या रोशन हुआ
जब वो इन हाथों से पहली बार रोशन रोशन हुआ

वो मेरे सीने से लग कर जिसको रोइ वो कौन था
किसके बुझने पर आज मैं उसकी जगह रोशन हुआ

तेरे अपने तेरी किरणो को तरसते हैं यहाँ
तू ये किन गलियों में किन लोगों में जा रोशन हुआ

अब उस ज़ालिम से इस कसरत से तौफे आ रहे हैं
की हम घर में नई अलमारियां बनवा रहे हैं

हमें मिलना तो इन आवादियों से दूर मिलना
उसे कहना गए वक़्तों में हम दरिया रहे हैं

बिछड़ जाने का सोचा तो नहीं था हमने लेकिन
तुझे खुश रखने की कोसिस में दुःख पंहुचा रहे हैं

  - Tehzeeb Hafi

Udas Shayari

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