
भला कब तक चलेगा सिलसिला ये बेबसी का
चलो अब ख़त्म करते हैं ये क़िस्सा ज़िंदगी का
मुझे अब और तेरी दुनिया में रहना नहीं है
ख़ुदा रस्ता दिखा दे अब मुझे तू ख़ुद-कुशी का
— ABhishek Parashar
Other sher from the same pen
Voices in the same orbit
Poetry by feeling