ज़िन्दगी के ज़ाविए वो
इस ग़ज़ल के क़ाफ़िए जो
ये किताबें इल्म देंगी
आप इन
में झाँकिए तो
हाँ मिलेगा चैन भी फिर
दर्द दिल का बाँटिए तो
ये उदासी मार देगी
आप इस को मारिए सो
कामयाबी ही नहीं अब
आबले भी देखिए तो
कीजिए उस को बराबर
झूठ सच भी तोलिए वो
जो नहीं सच बोलता है
तोड़िए उस आइने को
है सुकूँ सलमा बड़ा ही
शा'इरी ये कीजिए तो
— Salma Malik















