दिल ही दिल को समझाता है

दिल ही दिल को फुसलाता है

हद से गर ये बढ़ जाए तो
फिर ये आदत बन जाता है

दौलत शौहरत रास न आए
जब ये नस में चढ़ जाता है

दिल न लगाएँ कह दो सब से
दिल का लगाया मर जाता है

दर्द-ए-दिल को चारा-गर भी
ठीक नहीं फिर कर पाता है

इश्क़ बड़ी इक बीमारी है
इश्क़ बड़ा ही तड़पाता है

आसाँ नईं है जीना सलमा
जीने वाला मर जाता है

— Salma Malik

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