Salma Malik

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@thesalmamalik

Salma Malik shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Salma Malik's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

फिर हम ने दुबारा नहीं माँगा उसे 'सलमा' इक बार ख़ुदा हम सेे जिसे छीन चुका था — Salma Malik
ख़ुदा सलामत रक्खे तुम को मेरे बेटे तुम ने तो मेरी ज़िन्दगी मुकम्मल कर दी — Salma Malik
मैं भी अपनी माँ के जैसे अपनी बेटी को चाहूँ मैं ने रब से चाहा भी यही है कि मुझे इक बेटी हो — Salma Malik
हर रोज़ बूढ़े हो रहें हैं वालिदैन क्या ग़म नहीं ये भी सताता है तुम्हें — Salma Malik
बैठिए छाँव में आप बेशक मगर एक पौधा कभी तो ज़रा सींचिए — Salma Malik
बहुत अच्छी नहीं होती उदासी हर घड़ी की ग़मों से चूर हो जाओ तो रो कर देख लेना — Salma Malik
ख़र्च कर के वक़्त बेहद शे'र इक इक बनता है तब कहीं जाके ग़ज़ल में जान पैदा होती है — Salma Malik
लाज़िम है मेरी ग़ज़लों में तेरी परछाईं का होना ना-मुमकिन है तेरी नज़्मों में मेरा अक्स समाया हो — Salma Malik
इक शख़्स है काफ़ी हमारा दिल दुखाने के लिए 'सलमा' हमें सारे ज़माने की ज़रूरत ही नहीं — Salma Malik
ये ज़िन्दगी जीने को बस ज़िंदादिली सलमा ज़रूरी है ये बे-दिली तो आदमी को बे-दिली से मार देती है — Salma Malik
जिस के बिना तेरी कहानी ना-मुकम्मल है मिरी जानाँ तेरी कहानी का ज़रूरी बस वही किरदार हूँ मैं तो — Salma Malik
सूद क्या तुम अदा कर नहीं सकते हो अस्ल भी सिर तुम्हारे हैं इतने अभी क़र्ज़ माँ-बाप के — Salma Malik
मैं ख़ुद को बेहतर से भी बेहतर इक रोज़ बना लूँगी तुम भी देखोगे जब मैं मुट्ठी में चाँद छुपा लूँगी — Salma Malik
तुम लड़के तो इश्क़ में पागल भी हो सकते हों हम लड़की तो इतनी ख़ुश-क़िस्मत भी नईं होती — Salma Malik
कुछ इस तरह तोड़ा गया है दिल हमारा ये बेवा की जैसे तोड़ता है चूड़ियाँ कोई — Salma Malik
मरा वो शख़्स इक दिन डूबकर के इस उदासी में सिखाता था अदाएँ जो ग़मों में मुस्कुराने की — Salma Malik
आदतन ही तुम्हें याद करती है 'सलमा' मगर दरमियाँ अब हमारे नहीं कोई भी राब्ता — Salma Malik

Ghazal

तू कोह-ए-तूर हो जा आँखों में चमकेगा तेरा किरदार तिरी आँखों से हँस देगा मुझ को खोने वाले ये जान ज़रा तू भी मुझ को खो कर के बेहद तू ही तड़पेगा ठोकर से भी जो रीत न समझे दुनिया की औरों की ठोकर को फिर वो क्या समझेगा मख़मल के बिस्तर पे जो सोता आया है सड़कों पे जगने को वो क्या ही समझेगा बस फूलों पर ही पाँव रखे हों जिस ने भी पैरों के छालों को वो कैसे समझेगा माँ बाप अगर ये ख़ूँ के आँसू रोते हैं जिस रोज़ न होंगे कौन तुम्हें फिर थपकेगा अब क़द्र नहीं है जिस घर की तुम को प्यारों बेघर होकर के ये दिल घर को तड़पेगा माना ये इश्क़ मज़ा देता है जाँ लेकिन क्या होगा फिर जब ख़ून जिगर से टपकेगा मेरी ग़ज़लें पढ़कर के 'सलमा' इक दिन तो वो भी मुझ को ग़ज़लें लिखने को तरसेगा — Salma Malik
अनमोल इस वक़्त को यूँँ गँवाया नहीं जाता बीता हुआ वक़्त वापस भी लाया नहीं जाता हर राज़ दिल का सभी से बताया नहीं जाता पर हाल-ए-दिल भी ये हम सेे छुपाया नहीं जाता फ़र्ज़-ए-किफ़ाया भी तो कुछ हुआ करता है जान हर फ़र्ज़ तो इन्फ़िरादी निभाया नहीं जाता अपना निवाला भी जिन बच्चों को माँ खिलाती है उन सेे निवाला उसे इक खिलाया नहीं जाता ये रूह तो ढो लिया करती है जिस्म का बोझ पर जिस्म से बोझ इस का उठाया नहीं जाता बिन मर्ज़ी ब्याही गई दुल्हनें लाश हैं और लाशों को तो दुल्हनों सा सजाया नहीं जाता सफ़्हे पलटना ही सलमा सँवारे ये तक़दीर अच्छी किताबों से घर बस सजाया नहीं जाता — Salma Malik

Nazm