मिरी ये ज़िंदगी हद से ज़ियादा क्या होगी
बहुत ज़ियादा भी होगी तो बस फ़ना होगी
किसी कम अक्ल का क़लमा भी होगा इक बकवास
किसी ज़हीन की गाली भी फ़लसफ़ा होगी
भुगत रहा हूँ सज़ा माज़ी की मैं बन कर ख़ार
और आज ख़ार हूँ कल इस की भी सज़ा होगी
तुम्हारे बा'द मुझे मौत से भी क्या होगा
तुम्हारे बा'द मिरी ज़िंदगी भी क्या होगी
मिरे ज़हान में आने का क्या सबब है शम्स
मिरे जहान से जाने की वज्ह क्या होगी
— ADITYA TIWARI















