baat-baat pe wa-waah karne waale | बात-बात पे वा-वाह करने वाले

  - Umrez Ali Haider

बात-बात पे वा-वाह करने वाले
तुम ही हो मुझे गुमराह करने वाले

जा रहे हो तुम जो आह करने वाले
मिल गया कोई? परवाह करने वाले

जो तुझे किसी की आरज़ू हो, उठ, चल
कुछ उठा क़दम भी चाह करने वाले

ख़ाक थी बिसाते-हस्ती तो ये अपनी
शुक्र है तिरा ही शाह करने वाले

बे-बसी बुतों की क्या तुम्हें न दिखती
कोई बुत को फिर अल्लाह करने वाले

क्या यही ख़ज़ाने में बचा है तेरे
ये जफ़ा मेरी तनख़्वाह करने वाले

आगही ये तेरी अब करे भी तो क्या
जान जा चुकी आगाह करने वाले

शिप कोई भी तो ले लो कहीं से 'हैदर'
मेरे दिल को बन्दरगाह करने वाले

  - Umrez Ali Haider

Hasrat Shayari

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