fenk kar raat ko deewaar pe maare hote | फेंक कर रात को दीवार पे मारे होते

  - Unknown

फेंक कर रात को दीवार पे मारे होते
मेरे हाथों में अगर चाँद सितारे होते

  - Unknown

Neend Shayari

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    भूला नहीं हूँ आज भी हालात गाँव के
    हाँ, शहर आ गया हूँ मगर साथ गाँव के

    दुनिया में मेरा नाम जो रोशन हुआ अगर
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    Tanoj Dadhich
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    पपलू से उनकी बीवी ने कल रात कह दिया
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    सुन कर तमाम रात मेरी दास्तान-ए-ग़म
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    Firaq Gorakhpuri
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    Balmohan Pandey
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    चमेली रात कह रही थी मेरी बू लिया करें
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    Azbar Safeer
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    ख़ैरात में अब दे दिया जाए इसे
    हर रात नीदें ज़ाया होती रहती हैं
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    Sahil Verma
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    Tanoj Dadhich
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    Unknown
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    तुम मुस्कुरा दिए मिरी क़ीमत यही तो है

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    मेरे तलब की हद है न तेरे अता की हद
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    कोई चादर वफ़ा नहीं करती
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    Unknown
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    बोसा जो तलब मैं ने किया हँस के वो बोले
    ये हुस्न की दौलत है लुटाई नहीं जाती
    Unknown
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