"ख़ुदा"
हर किसी की चाह क्या कैसे पता हो
साफ़ कह दो सब ख़ुदा तो हूँ नहीं मैं
आप का है दर्द मुझ को क्यूँ पता हो
आप से यूँ अब जुदा तो हूँ नहीं मैं
याद रख आबाद है आवाज़ तेरी
तू कभी लड़ यूँ शुदा तो हूँ नहीं मैं
— Vinod Ganeshpure
हर किसी की चाह क्या कैसे पता हो
साफ़ कह दो सब ख़ुदा तो हूँ नहीं मैं
आप का है दर्द मुझ को क्यूँ पता हो
आप से यूँ अब जुदा तो हूँ नहीं मैं
याद रख आबाद है आवाज़ तेरी
तू कभी लड़ यूँ शुदा तो हूँ नहीं मैं
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