कटेगा ये मुश्किल सफ़र धीरे-धीरे

चलो साथ में तुम अगर धीरे-धीरे

ग़म-ए-जिंदगी ने सिखाया बहुत कुछ
गए और भी हम निखर धीरे-धीरे

है अफ़सोस उन को दिया छोड़ जलता
उठा बनके लावा शरर धीरे - धीरे

थे डरते कभी बात करने से अब वो
मिलाने लगे हैं नज़र धीरे- धीरे

भला कूं के कोयल की दे क्यूँ सुनाई
हैं कट जा रहे जब शजर धीरे- धीरे

— Vedic Dwivedi

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