इश्क़वालों को मोहब्बत का फ़साना याद है
मुस्कुरा कर आँख में आँसू छुपाना याद है
वैसे उन की सब अदाएँ का़तिलाना हैं बड़ी
उन का हम को देख कर नज़रे चुराना याद है
आशिक़ी में रूठ जाना मसअला तो है नहीं
रूठकर हम से हमीं पर हक जताना याद है
नफ़रतों का दौर है ये इश्क़ है अब मर रहा
तख़्त पाने के लिए दंगा कराना याद है
— Vedic Dwivedi















