तू याद आई और मैं कल देर तक रोयातस्वीर तेरी रख के बग़ल देर तक रोयाआंगन जहाँ पे खेल के बचपन बिताया थाघर अपना वो पुराना बदल देर तक रोया— Vedic Dwivedi