सुनने में आया है मेरा चर्चा नइँ था

मुझ को जितना लगता था मैं उतना नइँ था

उस को अच्छे लगते थे सब छैल छबीले
हम जैसों को उस से कोई ख़तरा नइँ था

सादा दिल थे सो हम अपने ही दुश्मन थे
वो भी अच्छा लगता था जो अच्छा नइँ था

शर्मीले साजन की सब बेशर्मी देखी
सब कुछ सोचा करता था वो कहता नइँ था

अच्छी सूरत कितनी अच्छी हो सकती थी
लेकिन तब तक मैं ने उस को देखा नइँ था

— Vishal Bagh

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