वक़्त माज़ी पे मुस्कुराता है
फोन अब उस तरफ़ से आता है
उस की आवाज़ भी बला की है
और वो शे'र भी सुनाता है
वो मुझे कुछ नहीं समझता पर
आज भी फ़ोन भी उठाता है
दोस्ती वोस्ती से बढ़कर है
हाँ भले दोस्ती का नाता है
— Vishal Singh Tabish
फोन अब उस तरफ़ से आता है
उस की आवाज़ भी बला की है
और वो शे'र भी सुनाता है
वो मुझे कुछ नहीं समझता पर
आज भी फ़ोन भी उठाता है
दोस्ती वोस्ती से बढ़कर है
हाँ भले दोस्ती का नाता है
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