इस तरह उस ने निकाला है हमें मंज़र सेजैसे फेंके कोई बेकार की चीज़ें घर सेवहाँ वो फेरती है ग़ैर के बालों में हाथऔर यहाँ झड़ रहे हैं बाल हमारे सर से— Viru Panwar Viyogi