लड़कों के जीवन का ये अफ़साना है

चूड़ी-चटकी काजल गजरा लाना है

सुनते हो चून्नू के पापा ऑफ़िस से
जल्दी आना गेहूँ और पिसाना है

बीबी माथा खाती साड़ी के ख़ातिर
गर्ल सखी को यार सिनेमा जाना है

कोई नहीं सुनता है माँ बाबूजी की
सब को अपना अपना ज्ञान चलाना है

धरती पे रहना है तो जैसे तैसे
हम को पैसों का इक पेड़ लगाना है

यार कमाई ख़ुद की तो ख़ुद खर्च सके
मुझ को ऐसा इक संसार बसाना है

साँच कहूँ तो ऊब गया हूँ मैं पोटर
मुझ को अगले जन्म यहाँ नइंँ आना है

— Vijay Potter Singhadiya

More by Vijay Potter Singhadiya

Other ghazal from the same pen

See all from Vijay Potter Singhadiya →

Maa Shayari

Shers of maa.

All Maa Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling