छुपा मैं सब सेे रखूँगा लगा के सीने से
मुझे जो कुछ भी मिलेगा ख़ुदा मदीने से
तू रब तू सब तू ही मुर्शिद तू रहनुमा मेरा
मैं गिर गया हूँ भँवर में तेरे सफ़ीने से
उठा हूँ गिर के भी मैं बार बार हर दम यार
चमक रही है ये क़िस्मत मेरी पसीने से
मैं चढ़ रहा हूँ अभी तक नई नई सीढ़ी
मुझे दिखा था कभी चाँद मेरे ज़ीने से
चुरा के नींद दिखाता है ख़्वाब दिन में भी
हसीन यार चुराले जो दिल भी सीने से
मुझे थी ख़ूब पिलाई शराब यारों ने
मगर हुआ ही नहीं कम ये दर्द पीने से
मिटे नहीं हैं न मिट सकते हैं कभी दिल से
न ज़ख़्म होते कभी ठीक सिर्फ़ सीने से
— Anuj Vats















