Anuj Vats

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@writer_anuj

Anuj Vats shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Anuj Vats's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

क्या करूँँ मैं गर समझ लिया है लोगों ने इस सफ़र को घर समझ लिया है लोगों ने — Anuj Vats
इक दिन दिल ऊब जाएगा शे'र-ओ-शाइ'री से अनबन अजीब सी हो जाएगी ज़िंदगी से — Anuj Vats

Ghazal

हम जानते हैं क्या वो लिखेंगे जवाब में दिखते कई दिनों से है ख़त मेरे ख़्वाब में ये जावेदाँ नहीं है नशा इश्क़ विश्क़ का मैं इस लिए भी डूबा हूँ यक्सर शराब में क्यूँ लोग डूब जाते हैं सब भूल भाल के किस ने भला उतारा है दरिया किताब में आया है ज़िंदगी के पहाड़े में इतना दुख मुझ सेे हुई तो है कोई ग़लती हिसाब में हम ने सुना है माँगती है आईफ़ोन अब पहले तो मान जाती थी बस इक गुलाब में कोई निकालो गर्दि- ए-अय्याम से मुझे दम घुट रहा है ज़िंदगी के इस अज़ाब में ग़ुस्से से देखा उस ने मुझे तो पता चला शबनम के साथ शो'ला भी है माहताब में — Anuj Vats
तेरे हाथों में है क्यूँ ख़ंजर हसीना काम हो आँखों से तो बेहतर हसीना मेरे कहने से कहाँ होता है अब कुछ हो वही कह दे जो भी हँस कर हसीना हर कोई दफ़्तर के चक्कर काटता है बन के आई गाँव में अफ़सर हसीना क्यूँ बदलती है वो कपड़े रील्स में अब हो गई है सच में क्या बे-घर हसीना ये दुकान-ए-हुस्न कब तक यूँँ चलेगी मान मेरी काम भी कुछ कर हसीना आशिक़ों का हाल भी तो देख बेरहम मुँह दिखाना है ख़ुदा को डर हसीना बाल बिखरे होंठ पे है ज़ख़्म गोया सच कहो कोई तो है चक्कर हसीना मेरी ग़ज़लों से मेरी आँखों से डरती सामने काँपे मेरे थर थर हसीना है शिकायत एक ही दुनिया से यारो क्यूँ नहीं है मुझ को हासिल हर हसीना गुल खिले रहते हैं गुलशन में हज़ारों पर अकेली होती है अक्सर हसीना — Anuj Vats
तुम ने कभी न समझा इस सादगी का मतलब तुम को पता लगेगा मेरी कमी का मतलब ग़म झेल कर भी सारे तुम मुस्कुरा रहे हो शायद समझ गए हो तुम ज़िंदगी का मतलब आदत यही है तेरी हँस हँस के बात करना मैं देर से हूँ समझा तेरी हँसी का मतलब बेटी के पास बैठे शादी के दिन पिता जी समझाने फिर लगे वो शर्मिंदगी का मतलब मछली को जैसे पानी तुम वैसे मुझ को जानी अब तो जनाब समझो तुम लाज़मी का मतलब वो दूर दूर रहना पूछो तो कुछ न कहना मेरे अलावा भी था वो तब किसी का मतलब कहता है ठीक है सब रखता छुपा के हर दम इक आदमी ही जाने इक आदमी का मतलब हो शे'र ये किसी का या हो ग़ज़ल किसी की मेरे लिए तो तुम हो हर शा'इरी का मतलब क्यूँ बाप मर गया था पंखे से यूँँ लटक कर बेटे को क्या बताए माँ ख़ुद-कुशी का मतलब — Anuj Vats
थे रुके नभ में बादल भी जाते हुए देख बारिश में उस को नहाते हुए कितनी है ख़ूब-सूरत बताऊँ तुम्हें फूल भी छेड़ते आते जाते हुए रात देखे उसे प्यार से रात भर सो गई सुब्ह उस को जगाते हुए बात घंटों किसी शाम हो प्यार की पैर आधे नदी में डुबाते हुए चाँद जैसा बदन फूल जैसा है दिल ऐ ख़ुदा क्या था सोचा बनाते हुए एक धुन थी सुब्ह उस के होंटों पे रब दिन मिरा गुज़रा वो गुनगुनाते हुए और प्यारी मुझे लग रही है सनम जब से देखा उसे आम खाते हुए दिल भी पत्थर हुआ हम भी पत्थर हुए आख़िरी बार सीने लगाते हुए ज़ख़्म तो हैं क़ुरेदे उसी शे'र ने रो पड़ा जिस को शाइ'र सुनाते हुए — Anuj Vats
रक्खा है दिल गुमान-भरा उस के पैरों में और आ गया ये बाँकपना उस के पैरों में क्या क्या हो सकता था ये मलामत भी रहती है मैं ने बिताई रात ख़ुदा उस के पैरों में फ़तवा निकल चुका है मेरे नाम का भी अब क़लमा जो मैं ने बैठ पढ़ा उस के पैरों में देखा जो हौसला कभी जंग-ए-हयात में दुश्मन भी आके ख़ुद ही गिरा उस के पैरों में सोचा था आज क़त्ल ही कर दें रक़ीब का फिर ज़िंदा यूँँ ही छोड़ दिया उस के पैरों में तुम भेजते हो पहले फ़लक तक दुआ कोई फिर आती है फ़लक से दुआ उस के पैरों में राजा भी सोचे राज कुमारी ने देखा क्या कासा भी टूटा फूटा पड़ा उस के पैरों में — Anuj Vats
छुपा मैं सब सेे रखूँगा लगा के सीने से मुझे जो कुछ भी मिलेगा ख़ुदा मदीने से तू रब तू सब तू ही मुर्शिद तू रहनुमा मेरा मैं गिर गया हूँ भँवर में तेरे सफ़ीने से उठा हूँ गिर के भी मैं बार बार हर दम यार चमक रही है ये क़िस्मत मेरी पसीने से मैं चढ़ रहा हूँ अभी तक नई नई सीढ़ी मुझे दिखा था कभी चाँद मेरे ज़ीने से चुरा के नींद दिखाता है ख़्वाब दिन में भी हसीन यार चुराले जो दिल भी सीने से मुझे थी ख़ूब पिलाई शराब यारों ने मगर हुआ ही नहीं कम ये दर्द पीने से मिटे नहीं हैं न मिट सकते हैं कभी दिल से न ज़ख़्म होते कभी ठीक सिर्फ़ सीने से — Anuj Vats