Rishabh Katariya

Rishabh Katariya

@RishabhKatariya

Rishabh Katariya shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Rishabh Katariya's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
दिन बसर हो रहा है तुम्हारे बिना
यह असर हो रहा है तुम्हारे बिना

अब कई लोग आकर के बसने लगे
मन शहर हो रहा है तुम्हारे बिना
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Rishabh Katariya
लाख पहरे हुए है तुम्हारे बिना
घाव गहरे हुए है तुम्हारे बिना

प्रेम की राह पर हर कोई चल रहा
हम ही ठहरे हुए है तुम्हारे बिना
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Rishabh Katariya
दर्द ज़ाया हुआ है तुम्हारे बिना
सब भुलाया हुआ है तुम्हारे बिना

तीन हफ़्ते से बेमन ही संगीत में
मन लगाया हुआ है तुम्हारे बिना
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Rishabh Katariya
सांझ का जाप है तेरे प्यार का
हमको संताप है तेरे प्यार का

आज जो कुछ भी है मेरा कुछ नहीं
ये तो अभिशाप है तेरे प्यार का
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Rishabh Katariya
छोड़कर अपना भी असर जाएंगे
या तो डूबेंगे या तो तर जाएंगे

प्रेम एक ताज की तरह ही तो हैं
इसके पीछे कितने ही सर जाएंगे
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Rishabh Katariya
वक़्त का यह हसीं सितम तो नही
जिंदगी का गलत कदम तो नही

बीतता जा रहा जो तुम्हारे बिना
क्या पता आठवाँ जनम तो नही
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Rishabh Katariya
रोज संवाद करता नगर से तेरे
हर घड़ी ही गुजरता नगर से तेरे

हैं यहाँ की हवा में ही दीवानगी
कैसे ना प्रेम करता नगर से तेरे
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Rishabh Katariya
औषधि जाने कितनी लगाई गयी
और लाखों रुपए की दवाई गयी

कोई उपचार जब काम ना आ सका
हमको सूरत तुम्हारी दिखाई गयी
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Rishabh Katariya
साथ मुझको चलाना नहीं चाहता
मेरा कोई बहाना नहीं चाहता

तुमनें जब से कहा है पराया हमें
कोई अपना बनाना नहीं चाहता
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Rishabh Katariya
दिन बसर हो रहा है तुम्हारे बिना
यह असर हो रहा है तुम्हारे बिना

अब कई लोग आकर के बसने लगे
मन शहर हो रहा है तुम्हारे बिना
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Rishabh Katariya