Beybaar

Top 10 of Beybaar

    इश्क़ इस कदर कुछ दोनों के हिस्से में आया
    हम ने बारहा खोया तुम ने बारहा पाया

    अगली ज़िन्दगी में तुम मैं बनो ये देखो फिर
    किस कदर मुहब्बत में तुम ने हम को तड़पाया

    तेरे जाने के बा'द आए न जाने क्या मौसम
    छाँव चुभती है अब तक बारिशों ने झुलसाया

    वो वफ़ा की बातें ता'उम्र साथ का वा'दा
    ये पुराने चर्चे हैं हम ने मन को बहलाया

    अब नहीं सवेरा बेबार उस के होने से
    रात भर जली लौ में हम ने ख़ुद को समझाया
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    कोहरा जो देखा उस ने ठिठराके मुझ से पूछा
    मौसम ये सर्द है या हसरत जली है कोई
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    किसी सीने पे आहट दी, किसी काँधे पे सर रक्खा
    हुए कितने भी बेपरवाह मगर बस एक घर रक्खा
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    प्यास हूँ सहरा की मैं, इक बूँद पानी चाहिए
    या गुमाँ रखने को दरिया की निशानी चाहिए

    भूल जाने के उसे, क़िस्से बहुत से याद हैं
    याद करने को मगर कोई कहानी चाहिए
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    फूल दिल तक़दीर में आए बहुत
    पर हमें पत्थर के मन भाए बहुत

    राह के काँटों से रक्खा राबता
    पाँव के छाले भी शरमाए बहुत

    नक़्श देखे रोज़ उस के इक वही
    आइना अपने पे इतराए बहुत

    जान ले कर भी शराफ़त देखिए
    नुस्ख़े वो जीने के बतलाए बहुत

    जब तवक़्क़ो ही नहीं इस ज़ीस्त से
    फिर हमें दुनिया क्यूँ समझाए बहुत
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    भले हैं फ़ासले क़ुर्बत से ख़ौफ़ लगता है
    ये क्या बला है जो ऐसी विरानी क़ैद हुई
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    काग़ज़ की कश्ती
    उन रोज़ जब बचपन में
    कोई पनारा बहता था
    मन काग़ज़ की कश्ती बना कर
    संग संग उस के रहता था

    हम कश्तियाँ बना बना कर
    बारिश में बहाते रहते
    पनारा मिलता नाले में
    नाले मिलते दरिया में
    कोई कश्ती तो पहुँची होगी
    हम जागे रहते दुपहरिया में

    क्या ख़ूब ठिठोली होती थी
    वक़्त की मीठी गोली होती थी
    अभी अभी पता चला
    वो ऊपर बैठा खेल रहा है
    बना बना के भेज रहा है कश्तियाँ
    दरिया-ए-वक़्त में बहने के लिए

    कुछ गल जाएँगी
    कुछ डूब जाएँगी
    कुछ के गीले लुथड़े पहुँचेंगे
    लमहों की लहरों में फँसकर

    फिर से ख़ूब ठिठोली होगी ऊपर
    काग़ज़ की कश्ती का खेल मुसलसल
    वो मालिक हद-ए-वक़्त तक पहुँचाएँगे
    हम उसी ठिठोली की ख़ातिर
    गल गल कर बह जाएँगे.
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