इश्क़ इस कदर कुछ दोनों के हिस्से में आया
हम ने बारहा खोया तुम ने बारहा पाया
हम ने बारहा खोया तुम ने बारहा पाया
अगली ज़िन्दगी में तुम मैं बनो ये देखो फिर
किस कदर मुहब्बत में तुम ने हम को तड़पाया
तेरे जाने के बा'द आए न जाने क्या मौसम
छाँव चुभती है अब तक बारिशों ने झुलसाया
वो वफ़ा की बातें ता'उम्र साथ का वा'दा
ये पुराने चर्चे हैं हम ने मन को बहलाया
अब नहीं सवेरा बेबार उस के होने से
रात भर जली लौ में हम ने ख़ुद को समझाया
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भले हैं फ़ासले क़ुर्बत से ख़ौफ़ लगता है
ये क्या बला है जो ऐसी विरानी क़ैद हुई
ये क्या बला है जो ऐसी विरानी क़ैद हुई
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काग़ज़ की कश्ती
उन रोज़ जब बचपन में
कोई पनारा बहता था
मन काग़ज़ की कश्ती बना कर
संग संग उस के रहता था
हम कश्तियाँ बना बना कर
बारिश में बहाते रहते
पनारा मिलता नाले में
नाले मिलते दरिया में
कोई कश्ती तो पहुँची होगी
हम जागे रहते दुपहरिया में
क्या ख़ूब ठिठोली होती थी
वक़्त की मीठी गोली होती थी
अभी अभी पता चला
वो ऊपर बैठा खेल रहा है
बना बना के भेज रहा है कश्तियाँ
दरिया-ए-वक़्त में बहने के लिए
कुछ गल जाएँगी
कुछ डूब जाएँगी
कुछ के गीले लुथड़े पहुँचेंगे
लमहों की लहरों में फँसकर
फिर से ख़ूब ठिठोली होगी ऊपर
काग़ज़ की कश्ती का खेल मुसलसल
वो मालिक हद-ए-वक़्त तक पहुँचाएँगे
हम उसी ठिठोली की ख़ातिर
गल गल कर बह जाएँगे.
Read Fullकोई पनारा बहता था
मन काग़ज़ की कश्ती बना कर
संग संग उस के रहता था
हम कश्तियाँ बना बना कर
बारिश में बहाते रहते
पनारा मिलता नाले में
नाले मिलते दरिया में
कोई कश्ती तो पहुँची होगी
हम जागे रहते दुपहरिया में
क्या ख़ूब ठिठोली होती थी
वक़्त की मीठी गोली होती थी
अभी अभी पता चला
वो ऊपर बैठा खेल रहा है
बना बना के भेज रहा है कश्तियाँ
दरिया-ए-वक़्त में बहने के लिए
कुछ गल जाएँगी
कुछ डूब जाएँगी
कुछ के गीले लुथड़े पहुँचेंगे
लमहों की लहरों में फँसकर
फिर से ख़ूब ठिठोली होगी ऊपर
काग़ज़ की कश्ती का खेल मुसलसल
वो मालिक हद-ए-वक़्त तक पहुँचाएँगे
हम उसी ठिठोली की ख़ातिर
गल गल कर बह जाएँगे.
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