10
1 Like
9
1 Like
अगर ये रुकना मुहाल न हो
अगर ये अर्जेंट कॉल न हो
न जाने पर गर वबाल न हो
तो मेरी मानो ठहर ही जाओ
न दूर जा कर मुझे सताओ
ये क्या कहा कि नहीं रुकोगे
सफ़र ज़रूरी है चल पड़ोगे
किसी की मिन्नत नहीं सुनोगे
जो ठान ली है तो कर ही दोगे
तो मुझ को मेरा ये दर मुबारक
तुम्हें वो उजला शहर मुबारक
ऐ मेरे पहलू से जाने वाले
नए शहर का सफ़र मुबारक
जो अब सफ़र पर निकल पड़े हो
नई डगर पर जो चल पड़े हो
तो अपने दिल का ख़याल रखना
मेरी मुहब्बत सँभाल रखना
Read Fullअगर ये अर्जेंट कॉल न हो
न जाने पर गर वबाल न हो
तो मेरी मानो ठहर ही जाओ
न दूर जा कर मुझे सताओ
ये क्या कहा कि नहीं रुकोगे
सफ़र ज़रूरी है चल पड़ोगे
किसी की मिन्नत नहीं सुनोगे
जो ठान ली है तो कर ही दोगे
तो मुझ को मेरा ये दर मुबारक
तुम्हें वो उजला शहर मुबारक
ऐ मेरे पहलू से जाने वाले
नए शहर का सफ़र मुबारक
जो अब सफ़र पर निकल पड़े हो
नई डगर पर जो चल पड़े हो
तो अपने दिल का ख़याल रखना
मेरी मुहब्बत सँभाल रखना
8
1 Like
7
3 Likes
"कोहकन"
ऐ मेरे कोहकन
कोह कनी छोड़ दे
कोहसारों से आगे भी
दुनियाँ है एक
मानता हूँ कि तेरी हथेली ने
कितने ही कोहसार
रेज़ा रेज़ा किए
शहर के सब मकानों की
तामीर में तेरा हिस्सा भी है
तू ने चट्टान काटी तो बरसो
स तरसे हुए संग, मरमरीं हो गए
आज महलो की ज़ीनत बने हैं मगर
कोई भी तो नहीं जो इन्हे देख कर
तेरा चर्चा करे
ऐ मेरे कोहकन
कोहकनी छोड़ दे
Read Fullकोह कनी छोड़ दे
कोहसारों से आगे भी
दुनियाँ है एक
मानता हूँ कि तेरी हथेली ने
कितने ही कोहसार
रेज़ा रेज़ा किए
शहर के सब मकानों की
तामीर में तेरा हिस्सा भी है
तू ने चट्टान काटी तो बरसो
स तरसे हुए संग, मरमरीं हो गए
आज महलो की ज़ीनत बने हैं मगर
कोई भी तो नहीं जो इन्हे देख कर
तेरा चर्चा करे
ऐ मेरे कोहकन
कोहकनी छोड़ दे
6
2 Likes
बज़्म-ए-तरब ख़रोश में शामिल हैं सब रक़ीब
ले चल मेरे ख़याल मुझे अब यहाँ से दूर
उस जगह मेरी क़ब्र बनाना ऐ मेरे दोस्त
उन के मकाँ के पास रहूँ ला-मकाँ से दूर
5
3 Likes
"एक ज्योति"
ज़िंदगी मुश्किलों का सफ़र है जहाँ
नीम तारीक रातें हैं
और ख़ार हैं
चहार जानिब दजल की वबा आम है
इश्क़ उल्फ़त तअ'ल्लुक़ भी
व्यापार है
लोग अपने होकर भी अपने नहीं
अपने चेहरों पे झूठी हँसी
ले के दुनिया को गुमराह
करने से हरगिज़ नहीं थक रहे
मेरे ज़ख़्मों के पकने के है मुल्तमिस
यार ज़ख़्मों पे मरहम नहीं रख रहे
महव-ए-हैरत हूँ दुनिया के चलने पे मैं
रोज़ सूरज के उगने और ढलने पे मैं
तीरगी आम है रात बदनाम है
हाँ उफ़क़ पर मगर एक दिया जल रहा है
जिस की किरणों से राहों में भटके हुए
राहगीरों को राह का पता चल रहा है
उस की ज्योति से रौशन नहीं आसमाँ
उस की किरणों से उठता नहीं ये जहाँ
पर अँधेरे की आँखों को एक ज्योति से
फूटती रौशनी गड़े जा रही है
वो अकेली है लेकिन
दर्द तकलीफ़ मअज़ूर मजबूर
मुश्किल नामुम्किन से हर दिन लड़े जा रही है
उस की हिम्मत को हैरत भरी दाद
सारा उफ़क़ दे रहा है
उस का लड़ना मुझे आप को
ज़िंदगी का सबक़ दे रहा है
Read Fullनीम तारीक रातें हैं
और ख़ार हैं
चहार जानिब दजल की वबा आम है
इश्क़ उल्फ़त तअ'ल्लुक़ भी
व्यापार है
लोग अपने होकर भी अपने नहीं
अपने चेहरों पे झूठी हँसी
ले के दुनिया को गुमराह
करने से हरगिज़ नहीं थक रहे
मेरे ज़ख़्मों के पकने के है मुल्तमिस
यार ज़ख़्मों पे मरहम नहीं रख रहे
महव-ए-हैरत हूँ दुनिया के चलने पे मैं
रोज़ सूरज के उगने और ढलने पे मैं
तीरगी आम है रात बदनाम है
हाँ उफ़क़ पर मगर एक दिया जल रहा है
जिस की किरणों से राहों में भटके हुए
राहगीरों को राह का पता चल रहा है
उस की ज्योति से रौशन नहीं आसमाँ
उस की किरणों से उठता नहीं ये जहाँ
पर अँधेरे की आँखों को एक ज्योति से
फूटती रौशनी गड़े जा रही है
वो अकेली है लेकिन
दर्द तकलीफ़ मअज़ूर मजबूर
मुश्किल नामुम्किन से हर दिन लड़े जा रही है
उस की हिम्मत को हैरत भरी दाद
सारा उफ़क़ दे रहा है
उस का लड़ना मुझे आप को
ज़िंदगी का सबक़ दे रहा है
4
2 Likes
नया सूरज दिखाया जा रहा है
चराग़-ए-शब बुझाया जा रहा है
चराग़-ए-शब बुझाया जा रहा है
लगा कर झूट का पर्दा अदास
यहाँ सच को छिपाया जा रहा है
उसे दिल में बसाया जा चुका है
जिसे क़सदन भुलाया जा रहा है
जहाँ को हम हँसाना चाहते हैं
मगर हम को रुलाया जा रहा है
उसे आग़ोश में भरने लगे हम
ज़माना बिलबिलाया जा रहा है
यही मिट्टी हमारी आबरू है
हमें जिस
में मिलाया जा रहा है
महल तामीर करने थे हमें भी
ग़ज़ल से बस किराया जा रहा है
3
3 Likes
एक आवाज़ बुलाती है चले जाते हैं
जब वो आँखों से पिलाती है चले जाते हैं
जब वो आँखों से पिलाती है चले जाते हैं
महफ़िल-ए-यार में अग़यार के ता'ने तौबा
याद तन्हाई की आती है चले जाते हैं
ज़िंदगी तू भी किसी रोज़ मनाने आजा
मौत आती है मनाती है चले जाते हैं
2
3 Likes
1
3 Likes










