हर बद-ज़ुबाँ से दूर हूँ हर बा-ज़ुबाँ से दूर
अक़्ल-ओ-ख़िरद की क़ैद से वहम-ओ-गुमाँ से दूर
बज़्म-ए-तरब ख़रोश में शामिल हैं सब रक़ीब
ले चल मेरे ख़याल मुझे अब यहाँ से दूर
उस जगह मेरी क़ब्र बनाना ऐ मेरे दोस्त
उन के मकाँ के पास रहूँ ला-मकाँ से दूर
— Salman Yusuf















