एक आवाज़ बुलाती है चले जाते हैं
जब वो आँखों से पिलाती है चले जाते हैं
महफ़िल-ए-यार में अग़यार के ता'ने तौबा
याद तन्हाई की आती है चले जाते हैं
ज़िंदगी तू भी किसी रोज़ मनाने आजा
मौत आती है मनाती है चले जाते हैं
— Salman Yusuf
जब वो आँखों से पिलाती है चले जाते हैं
महफ़िल-ए-यार में अग़यार के ता'ने तौबा
याद तन्हाई की आती है चले जाते हैं
ज़िंदगी तू भी किसी रोज़ मनाने आजा
मौत आती है मनाती है चले जाते हैं
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