Shubhangi kalii

Shubhangi kalii

@Shubhangi_kalii

Shubhangi kalii shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shubhangi kalii's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

कोई कान्हा अब नहीं आते यहाँ इज़्ज़त बचाने याद रखना लाज अपनी ख़ुद बचाने का समय है — Shubhangi kalii
यूँंँ तो किसी की इक नहीं सुनती मगर तू जो कहे तो मान लूंँ हर बात मैं — Shubhangi kalii
क़सम देकर उसे हम रोक सकते थे हमें ही बात मनवानी नहीं आई — Shubhangi kalii
बातें दवा का काम कर सकतीं हैं यार बीमार से तुम बात कर के देखना — Shubhangi kalii
हवाओं की ज़िद एक ज़ोरों से चलना दियों ने भी ठाना है जलते रहेंगे — Shubhangi kalii

Ghazal

और कितने ग़म उठाने हैं हमें इस ज़िंदगी में ऐ ख़ुदा धोखे पे धोखे मिल रहें हैं दोस्ती में ग़म मिलें ख़ुशियाँ मिलें हद में मिलें तो ठीक वर्ना कुछ नहीं दिखता ज़रुरत से ज़ियादा रौशनी में एक दिल था पास मेरे और वो भी खो गया है छोड़ आई हूँ तुम्हारे पास शायद हड़बड़ी में कल मुझे तोहफ़े में उस ने काँच के कंगन दिए थे लग रहा था चाँद तारे दे दिए हों तश्तरी में चार दिन की ज़िंदगी है एक दिन मरना है सब को यार छोड़ो ये लड़ाई क्या रखा है दुश्मनी में तुम कली हो इस सियासत से तुम्हें क्या लेना देना प्यार होना चाहिए बेहद तुम्हारी शा'इरी में — Shubhangi kalii