
बिना कुछ बताए मुझे रास्ते से हटाया गया है
किसी गुम हुई शै के जैसे अचानक भुलाया गया है
भला और करता भी क्या टूट कर के बिखरता नहीं तो
मिरा काँच का दिल था ऊपर से नीचे गिराया गया है
— Shubhangi kalii
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