ख़्वाब में मुझ को वो लड़की अब बहुत दिखने लगी है
यार अब घर की जगह वो दिल में ही रहने लगी है
जिस को नफरत सी हुआ करती कभी काग़ज़ क़लम से
इश्क़ में शायर के वो भी शा'इरी लिखने लगी है
सोचता था कुछ न होगा दूर होने से मुझे पर
आँख से अब यार अश्कों की नदी बहने लगी है
यार मैं मर भी गया तो मुझ को कोई ग़म न होगा
सामने सबके मुझे वो जान जो कहने लगी है
ब्लॉक जिसने मुझ को अपनी हर जगह से कर दिया था
अब वो लड़की फिर मुझे मैसेज क्यूँ करने लगी है
जो बिना डर के रही हर वक़्त अपने शहर में यश
नाम सुनते ही मिरा वो लड़की भी डरने लगी है
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