मुहोब्बत में ये जो वफ़ा चाहते हैं
ये समझो मेरी जाँ कज़ा चाहते हैं
हमीं से थे कहते निभा हम करेंगे
वही ये जो हम सेे जुदा चाहते हैं
कि उनके सिवा हमनें सब दे दिया फिर
लहू रो के हम सेे वो क्या चाहते हैं
ये माना मेरी जाँ ज़माना बुरा है
मगर हम भी किसको सदा चाहते हैं
ये इनको भी कह दो ये उन को भी कह दो
कि हम भी दवा नइँ दु'आ चाहते हैं
सहेली तुम्हारी बताती है सब कुछ
मगर हम भी तुम सेे सुना चाहते हैं
छुपाने लगे है पता चल गया हैं
तेरा भी ये काली बुरा चाहते हैं
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