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सच्ची उल्फ़त कर के हम दोनों ही पछताएँ यहाँ
मैं तुझी से हारी लेकिन तू भी जीता क्यूँ नहीं
मैं तुझी से हारी लेकिन तू भी जीता क्यूँ नहीं
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था उसी से इश्क़ और उस से रहेगा, या ख़ुदा
उस ने देखा कुछ ग़लत तो मुझ से पूछा क्यूँ नहीं
उस ने देखा कुछ ग़लत तो मुझ से पूछा क्यूँ नहीं
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ग़मों को दफ़्न कर हँसता है कोई
सिसक के रोता वो बच्चा है कोई
सिसक के रोता वो बच्चा है कोई
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मेरे हाथों में ग़म का पता देख कर
रूठती है ख़ुशी गमज़दा देख कर
रूठती है ख़ुशी गमज़दा देख कर
अब तो डसने लगी तीरगी भी मुझे
मेरे हाथों का दीया बुझा देख कर
रात दिन खाता था प्यार में वो क़सम
है ख़ुदा हैराँ अब बे-वफ़ा देख कर
पैसे ले कर जो नेता नहीं डरता, क्यूँ
डर गया वो ही अब कैमरा देख कर
जश्न करता रहा रात भर वो रक़ीब
ख़ुश हुआ था मेरा घर जला देख कर
मार देती है मांँ अपनी ही भूख 'दीप'
डिब्बे में खाना अक्सर ज़रा देख कर
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मेरे मरने की दुआ माँग रहे थे जो 'दीप'
बद-दुआ में ही मुझे उन का हुनर लगता है
बद-दुआ में ही मुझे उन का हुनर लगता है
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