Fakhira batool

Top 10 of Fakhira batool

    सारे मर्द एक जैसे नहीं होते
    इन में कुछ कॉमीटेड भी होते हैं
    लेकिन सुना है अब ये क़िस्म नायाब हो गई है
    जैसे डायनासोर
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    वो अक्सर मुझ से कहा करता कि मैं
    तुम्हारी शोहरत से बिल्कुल भी ख़ाइफ़ नहीं हूँ
    मैं बहुत ख़ुश होता हूँ
    तुम्हारी कामयाबियों को देख कर
    लेकिन लेकिन जब तुम किसी अजनबी को
    किसी भी अजनबी को ऑटोग्राफ देती हो तो
    तो मैं डर जाता हूँ
    क्यूँकि
    मैं ने भी तो
    मैं ने भी आग़ाज़ में तुम से ऑटोग्राफ ही लिया था
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    कभी हम फूल होते थे
    गुलाबी नर्म-ओ-नाज़ुक ओस में भीगा
    महकता मुस्कुराता ख़ुशबुओं को चूमने वाला
    मोहब्बत करने वाले झूम उठते जब हमें पाते
    हमें पोरों से छू कर रूह तक महसूस करते थे
    कई कॉलर कई आँखें अनोखे वस्ल के लम्हे
    हमारे मुंतज़िर होते
    हमारे हुस्न के चर्चे गली-कूचों में होते थे
    अदाओं के सुनहरे तीर पलकों में पिरोते थे
    हुई मुद्दत कि हम पतझड़ के पैरों की बने हैं धूल
    लेकिन ये हक़ीक़त है
    कभी हम फूल होते थे
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    मिरे बच्चे ने जब मुझ से कहा मम्मा
    ज़रा जुगनू मुझे ला दो
    मुझे तितली के रंगों को भी छूना है
    सितारे आसमाँ पर ही उगे हैं क्यूँ
    ज़मीं पर क्यूँ नहीं आते
    मुझे बस चाँद ला दो उस से खेलूँगा
    मैं चौंक उट्ठी
    यही कुछ मैं ने अपनी माँ से पूछा था
    मिरा मा'सूम सा बचपन
    जो मुट्ठी से फिसल कर खो गया शायद
    मिरा बच्चा जो मेरा आज है
    और आने वाला इक हसीं कल है
    लहू में उस की बातों से ही हलचल है
    ये मेरा क़ीमती पल है
    मिरा बच्चा हसीं ता'बीर बन कर सामने है और
    माज़ी ख़्वाब लगता है
    तो क्या मैं ख़्वाब से आगे निकल आई
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    ज़माना चाहता है हर-घड़ी बस नित-नई बातें
    नए दिन और नई शा
    में नई सुब्हें नई रातें
    नई क़स्में नए वादे नए रिश्ते नए नाते
    पुराने जो भी क़िस्से थे वो अब उस को नहीं भाते
    मैं ख़ुद लफ़्ज़ों की मिसरों की बहम तकरार से जानाँ
    बहुत उक्ता गई थी अब
    तो मैं ने यूँ किया लफ़्ज़ों को मिसरों को
    लपेटा सुर्ख़ काग़ज़ में
    फिर उन को मन में रक़्साँ आग दिखला दी
    हवा में राख के उड़ते हुए ज़र्रों ने जब पूछा
    करेगी क्या
    सुनेगी क्या कहेगी क्या
    तिरा दामन तो ख़ाली है
    कहा मैं ने
    मुझे अब कुछ नहीं करना
    मुझे अब कुछ नहीं सुनना मुझे अब कुछ नहीं कहना
    कहानी ओढ़ ली मैं ने
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    मोहब्बत हादसा है
    हादसे से बच निकलने की
    कोई तदबीर कर लो इस से पहले ख़्वाब हो जाओ
    जिसे हम हादसा कहते हैं
    जीवन को घड़ी-भर में
    मिटा कर ख़ाक करता है
    कोई इल्ज़ाम धरता है
    कभी माज़ूरियों के जाल में क़ैदी
    बना कर छोड़ देता है
    ये बंधन तोड़ देता है
    मोहब्बत हादसा है
    हादसे से बच निकलने की कोई तदबीर कर लो
    इस से पहले ख़्वाब हो जाओ
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    ख़ुदा ने जब शिफ़ा तक़्सीम की सारे ज़माने में
    तुम्हारी उँगलियों पर उस ने अपने हाथ से लिक्खा
    किसी बीमार को छू लो
    शिफ़ा उस का मुक़द्दर है
    तुम हर बीमार को अपना समझते हो
    मुदावा उस का करते हो
    हर इक बीमार के चेहरे पे रौनक़ तुम से क़ाएम है
    दुआ ईसाई की तुम को लग गई शायद
    तुम्हीं उम्मीद हो उस की
    शिफ़ा हाथों पे तुम ने रब से लिखवा ली
    मसीहा हो
    डॉक्टर हैदर शीराज़ी के नाम
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    तुम्हें अपना बनाना किस क़दर दुश्वार है जानाँ
    मगर इस से भी मुश्किल है
    तुम्हें दिल से भुला देना
    ज़रा सी बात थी जो तुम से कहनी थी
    मगर कहने की नौबत ही नहीं आई
    मुक़द्दर ने निहायत ही सुहूलत से
    तुम्हें मेरा बना डाला
    बिना मुश्किल के फिर मैं ने
    तुम्हें दिल से भुला डाला
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    इश्क़ पागल कर गया तो क्या करोगे सोच लो
    सानेहा ऐसा हुआ तो क्या करोगे सोच लो

    साथ उस के हर क़दम चलने की आदत किस लिए
    छोड़ कर वो चल दिया तो क्या करोगे सोच लो

    शोर बाहर है अभी इस वास्ते ख़ामोश हो
    शोर अंदर से उठा तो क्या करोगे सोच लो

    कर रहे हो घर नया ता'मीर उड़ती रेत पर
    ये अचानक गिर गया तो क्या करोगे सोच लो

    लौट कर जाना तो है आख़िर सभी को उस तरफ़
    सौ बरस भी जी लिया तो क्या करोगे सोच लो

    धड़कनें मद्धम हुई जाती हैं ऐ चारागरो
    चाक दिल का सिल गया तो क्या करोगे सोच लो

    बंद पलकों में अधूरे ख़्वाब बनते हो मगर
    कोई इन में आ बसा तो क्या करोगे सोच लो

    दर दरीचे सब मुक़फ़्फ़ल कर के बैठे हो मगर
    वो अचानक आ गया तो क्या करोगे सोच लो

    डूबते सूरज का चेहरा और उस का नक़्श-ए-पा
    जब ये मंज़र गुम हुआ तो क्या करोगे सोच लो
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