सारे मर्द एक जैसे नहीं होते
इन में कुछ कॉमीटेड भी होते हैं
इन में कुछ कॉमीटेड भी होते हैं
लेकिन सुना है अब ये क़िस्म नायाब हो गई है
जैसे डायनासोर
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कभी हम फूल होते थे
गुलाबी नर्म-ओ-नाज़ुक ओस में भीगा
गुलाबी नर्म-ओ-नाज़ुक ओस में भीगा
महकता मुस्कुराता ख़ुशबुओं को चूमने वाला
मोहब्बत करने वाले झूम उठते जब हमें पाते
हमें पोरों से छू कर रूह तक महसूस करते थे
कई कॉलर कई आँखें अनोखे वस्ल के लम्हे
हमारे मुंतज़िर होते
हमारे हुस्न के चर्चे गली-कूचों में होते थे
अदाओं के सुनहरे तीर पलकों में पिरोते थे
हुई मुद्दत कि हम पतझड़ के पैरों की बने हैं धूल
लेकिन ये हक़ीक़त है
कभी हम फूल होते थे
Read Fullमोहब्बत करने वाले झूम उठते जब हमें पाते
हमें पोरों से छू कर रूह तक महसूस करते थे
कई कॉलर कई आँखें अनोखे वस्ल के लम्हे
हमारे मुंतज़िर होते
हमारे हुस्न के चर्चे गली-कूचों में होते थे
अदाओं के सुनहरे तीर पलकों में पिरोते थे
हुई मुद्दत कि हम पतझड़ के पैरों की बने हैं धूल
लेकिन ये हक़ीक़त है
कभी हम फूल होते थे
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मिरे बच्चे ने जब मुझ से कहा मम्मा
ज़रा जुगनू मुझे ला दो
ज़रा जुगनू मुझे ला दो
मुझे तितली के रंगों को भी छूना है
सितारे आसमाँ पर ही उगे हैं क्यूँ
ज़मीं पर क्यूँ नहीं आते
मुझे बस चाँद ला दो उस से खेलूँगा
मैं चौंक उट्ठी
यही कुछ मैं ने अपनी माँ से पूछा था
मिरा मा'सूम सा बचपन
जो मुट्ठी से फिसल कर खो गया शायद
मिरा बच्चा जो मेरा आज है
और आने वाला इक हसीं कल है
लहू में उस की बातों से ही हलचल है
ये मेरा क़ीमती पल है
मिरा बच्चा हसीं ता'बीर बन कर सामने है और
माज़ी ख़्वाब लगता है
तो क्या मैं ख़्वाब से आगे निकल आई
Read Fullसितारे आसमाँ पर ही उगे हैं क्यूँ
ज़मीं पर क्यूँ नहीं आते
मुझे बस चाँद ला दो उस से खेलूँगा
मैं चौंक उट्ठी
यही कुछ मैं ने अपनी माँ से पूछा था
मिरा मा'सूम सा बचपन
जो मुट्ठी से फिसल कर खो गया शायद
मिरा बच्चा जो मेरा आज है
और आने वाला इक हसीं कल है
लहू में उस की बातों से ही हलचल है
ये मेरा क़ीमती पल है
मिरा बच्चा हसीं ता'बीर बन कर सामने है और
माज़ी ख़्वाब लगता है
तो क्या मैं ख़्वाब से आगे निकल आई
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ज़माना चाहता है हर-घड़ी बस नित-नई बातें
नए दिन और नई शा
नए दिन और नई शा
में नई सुब्हें नई रातें
नई क़स्में नए वादे नए रिश्ते नए नाते
पुराने जो भी क़िस्से थे वो अब उस को नहीं भाते
मैं ख़ुद लफ़्ज़ों की मिसरों की बहम तकरार से जानाँ
बहुत उक्ता गई थी अब
तो मैं ने यूँ किया लफ़्ज़ों को मिसरों को
लपेटा सुर्ख़ काग़ज़ में
फिर उन को मन में रक़्साँ आग दिखला दी
हवा में राख के उड़ते हुए ज़र्रों ने जब पूछा
करेगी क्या
सुनेगी क्या कहेगी क्या
तिरा दामन तो ख़ाली है
कहा मैं ने
मुझे अब कुछ नहीं करना
मुझे अब कुछ नहीं सुनना मुझे अब कुछ नहीं कहना
कहानी ओढ़ ली मैं ने
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पुराने जो भी क़िस्से थे वो अब उस को नहीं भाते
मैं ख़ुद लफ़्ज़ों की मिसरों की बहम तकरार से जानाँ
बहुत उक्ता गई थी अब
तो मैं ने यूँ किया लफ़्ज़ों को मिसरों को
लपेटा सुर्ख़ काग़ज़ में
फिर उन को मन में रक़्साँ आग दिखला दी
हवा में राख के उड़ते हुए ज़र्रों ने जब पूछा
करेगी क्या
सुनेगी क्या कहेगी क्या
तिरा दामन तो ख़ाली है
कहा मैं ने
मुझे अब कुछ नहीं करना
मुझे अब कुछ नहीं सुनना मुझे अब कुछ नहीं कहना
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मोहब्बत हादसा है
हादसे से बच निकलने की
हादसे से बच निकलने की
कोई तदबीर कर लो इस से पहले ख़्वाब हो जाओ
जिसे हम हादसा कहते हैं
जीवन को घड़ी-भर में
मिटा कर ख़ाक करता है
कोई इल्ज़ाम धरता है
कभी माज़ूरियों के जाल में क़ैदी
बना कर छोड़ देता है
ये बंधन तोड़ देता है
मोहब्बत हादसा है
हादसे से बच निकलने की कोई तदबीर कर लो
इस से पहले ख़्वाब हो जाओ
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जीवन को घड़ी-भर में
मिटा कर ख़ाक करता है
कोई इल्ज़ाम धरता है
कभी माज़ूरियों के जाल में क़ैदी
बना कर छोड़ देता है
ये बंधन तोड़ देता है
मोहब्बत हादसा है
हादसे से बच निकलने की कोई तदबीर कर लो
इस से पहले ख़्वाब हो जाओ
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Fakhira batool
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इश्क़ पागल कर गया तो क्या करोगे सोच लो
सानेहा ऐसा हुआ तो क्या करोगे सोच लो
सानेहा ऐसा हुआ तो क्या करोगे सोच लो
साथ उस के हर क़दम चलने की आदत किस लिए
छोड़ कर वो चल दिया तो क्या करोगे सोच लो
शोर बाहर है अभी इस वास्ते ख़ामोश हो
शोर अंदर से उठा तो क्या करोगे सोच लो
कर रहे हो घर नया ता'मीर उड़ती रेत पर
ये अचानक गिर गया तो क्या करोगे सोच लो
लौट कर जाना तो है आख़िर सभी को उस तरफ़
सौ बरस भी जी लिया तो क्या करोगे सोच लो
धड़कनें मद्धम हुई जाती हैं ऐ चारागरो
चाक दिल का सिल गया तो क्या करोगे सोच लो
बंद पलकों में अधूरे ख़्वाब बनते हो मगर
कोई इन में आ बसा तो क्या करोगे सोच लो
दर दरीचे सब मुक़फ़्फ़ल कर के बैठे हो मगर
वो अचानक आ गया तो क्या करोगे सोच लो
डूबते सूरज का चेहरा और उस का नक़्श-ए-पा
जब ये मंज़र गुम हुआ तो क्या करोगे सोच लो
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