हिन्दी
0
हिन्दी
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Leaderboard
Login
0
Home
Explore
Submit
Library
Profile
Top 10 of
Pravendra Anuragi
GHAZAL
झूठी क़समों का मुझे रोज़ हवाला दे कर
छीन लेता है सहारा वो सहारा दे कर
Pravendra Anuragi
10
GHAZAL
एक चिंगारी को ऐसे वो हवा देता था
आग के बनने से पहले ही बुझा देता था
Pravendra Anuragi
9
SHER
मुड़ के भी देखा नहीं जाते हुए उस ने हमें
रह गई होगी कमी कोई पज़ीराई में
Pravendra Anuragi
8
GHAZAL
वर्ना तो है ही क्या जो मिरे घर में नहीं है
पर चाहिए जो शख़्स मुक़द्दर में नहीं है
Pravendra Anuragi
7
GHAZAL
इस क़दर भा गई है इश्क़ में तन्हाई हमें
तेरी बाहों में भी फिर नींद नहीं आई हमें
Pravendra Anuragi
6
SHER
मैं किसी रोज़ रोऊँगा इतना कि फिर
कोई यादों का मंज़र दिखाई न दे
Pravendra Anuragi
5
GHAZAL
मिरे घर में मुहब्बत का हर इक सामान बाक़ी है
तिरा ग़म है नशा है और मुझ में जान बाक़ी है
Pravendra Anuragi
4
GHAZAL
वो सियाह रात मेरे हुजरे में गुज़ार कर
जा रहा है शौक़ से वो रौशनी पसार कर
Pravendra Anuragi
3
GHAZAL
जब अश्क आँखों से जुदा होने लगे
तो ग़म मिरे मुझ सेे ख़फ़ा होने लगे
Pravendra Anuragi
2
GHAZAL
कभी जब अपने घर की याद आती है
परिंदों को भी आज़ादी सताती है
Pravendra Anuragi
1
Amanpreet singh
Abuzar kamaal
Pritam sihag
Hassam Tajub
Pankaj murenvi
Manish watan
AMAN RAJ SINHA
Irshad Siddique "Shibu"
NISHKARSH AGGARWAL
Shadab bastavi