@RaunakKarn555
Raunak Karn shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Raunak Karn's shayari and don't forget to save your favorite ones.
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जब देखा उसको ऐसा लगा ख़्वाब में मैं हूँ
ख़्वाबों में उसको देख के ख़्वाबों में रख लिया
तस्वीर खींची साथ में मानो कि मैंने फिर
तस्वीर के अलावा इरादों में रख लिया
बैठने को जिसमें मेरा करता है ये मन बहुत
तुम वो मध्यम धूप के साए सी लगती हो मुझे
क्यूँ करोगी तुम सजावट तन पे या मन पे कोई
सच कहूँ तो तुम हमेशा सादा जचती हो मुझे
ज़िंदगी में ज़िंदगी का साथ दोगी ये कहो
तुम मेरे ही साथ जीवन भर रहोगी ये कहो
बात ये लागू न तुम पे बात ये बस मेरी है
तुम हमेशा ख़ुश रहोगी ये कहोगी ये कहो
तुमने ऐसा दिल पे तीर लगाया है
इश्क़ हमारे तन से बाहर आया है
तस्वीर तेरी देखी है मैंने जब से
साँस थमी है दिल ने होश गँवाया है
मैं बच के इश्क़ के रस्ते से चलना चाहता हूँ
मगर इक शख़्स इन आँखों में बसता जा रहा है
ज़ख़्म तो क़ीमती नेमत है तू ये माना कर
ज़ख़्म सीने से लगाएगा तो छा जाएगा
जब नहीं करता है कुछ तो है तू इतना आला
ख़ुद को पागल जो बनाएगा तो छा जाएगा
ज़माना देख लेगा कौन हैं हम वक़्त आने पर
अभी ख़ुद को जलाऍंगे अभी ख़ुद को तपाऍंगे
अभी तो जा रहे हैं डूब करके मात खाने को
मगर इक रोज़ रौनक़ बनके हम भी लौट आऍंगे
किसे कहते निकालो भीड़ से बाहर हमें 'रौनक'
सो करना क्या था ख़ुद को और भी गुमनाम कर डाला
हमारा नाम भी दिल से निकल गया होगा
वो शख़्स वक़्त के जैसे बदल गया होगा
कभी तो याद तेरे भी धुआँ धुआँ होंगे
पता तो बात ये तुझको भी चल गया होगा
मिले हो जितने लोगों से अभी तक ज़िंदगी में तुम
अरे उतने से तो हमने अभी तक धोखा खाया है
होंठ पे मुस्कान ले के सब शुमारे काट लेंगे
वो न होगी उसकी यादों के सहारे काट लेंगे
भला देखा है माँ की झुर्रियों को
रुलाता है मुझे वो इक सदी से
नहीं उठता है मुझसे बोझ घर का
कहीं आराम हो अब ख़ुद-कुशी से