sahllucknowi

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sahllucknowi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in sahllucknowi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Ghazal

हर एक शख़्स मुहब्बत में ढल रहा है आज मिरा ही दिल है जो बेबाक चल रहा है आज किसी किसी को ख़बर है मैं कैसा इंसाँ हूँ जो बे-ख़बर था वो अब हाथ मल रहा है आज न कोई रिश्ता न है कोई आश्ना उस सेे ज़माना जानता है फिर भी जल रहा है आज जो देखते हो ये मौसम सुहाना और हसीं ये सिर्फ़ हँसने से उस के बदल रहा है आज डरा डरा सा कभी रहता था जो शख़्स यहाँ किसी के प्यार के आँचल में पल रहा है आज दुआ कु़बूल भी की जा रही है मेरी अब सो धीरे धीरे वो दिल से निकल रहा है आज नसीब ने मिरे करवट कुछ इस तरह बदली कि एक पल का सुकूँ तक फिसल रहा है आज ये कश्मकश ही न होती जो मौत आ जाती वो शख़्स झूठ पे झूठ अब उगल रहा है आज उसे बस एक दफ़ा देखना था देख लिया तुम अब न पूछो कि कितना सफल रहा है आज ये सरकशी है या आवारगी है मेरी 'अनुज' मिरा ही जिस्म मुझे ही निगल रहा है आज — sahllucknowi
सब सेे बेहतर वो चेहरा दिखा था मुझे ग़ैर हो के भी अपना दिखा था मुझे एक भी फूल से ख़ुश नहीं होता था वो समुंदर से गहरा दिखा था मुझे जिस्म की ख़ुश्बू भी देती बख़्शिश में पर आँखों में ही बहाना दिखा था मुझे आसमाँ में जो होता है कोस-ए-कुज़ाह ठीक वैसा सुनहरा दिखा था मुझे कोई कहने को अपना नहीं था इधर एक मेरा ही साया दिखा था मुझे ज़िंदगी में उसी का ही है इख़्तियार इस लिए आज नख़रा दिखा था मुझे इतना मसऊल होना भी अच्छा नहीं उलझा सा इक परिंदा दिखा था मुझे आसमाँ की तरफ़ क्यूँँ मैं देखूँ भला नीली आँखों में तारा दिखा था मुझे दिल के बारे में क्या क्या बताऊॅं 'अनुज' कल समुंदर में सहरा दिखा था मुझे — sahllucknowi

Nazm