ख़्वाब था या सराब था मेरा
जो भी था लाजवाब था मेरा
क्यूँ हक़ीक़त ने मेरी दस्तक दी
कितना रंगीन ख़्वाब था मेरा
सब बदल जाता ठीक हो जाता
वक़्त कितना ख़राब था मेरा
निकली थी फिर मियान से तलवार
इश्क़ ही इक जवाब था मेरा
क्या लगा सच में ख़ुश था फ़ासले से
उस हँसी में अज़ाब था मेरा
तोहमतें काफ़ी ढो रहा था दिल
फिर भी ये दिल नवाब था मेरा
मत लगाओ यहाँ हिसाब 'अनुज'इश्क़ तो बे-हिसाब था मेरा
— sahllucknowi















