तुम कभी मेरे पास तो आओ
कहते हो मुझ को ख़ास तो आओ
छुप के बैठी है आप के अंदर
ख़त्म करनी है प्यास तो आओ
रुक ही जाएगा वक़्त का झरना
तुम गिरा के लिबास तो आओ
इतना मुश्किल भी ये नहीं होता
सीखना है विलास तो आओ
बातें तो सबकी होती हैं मीठी
है लबों पे मिठास तो आओ
— sahllucknowi















