जब जब हाथों को थामा था
तू लगता मुझ को प्यारा था
बेबस होना अच्छा सा है
कोई अपना मिल जाता था
जो कुछ भी आया हाथों में
पूरा का पूरा पाया था
तेरे बिन जीने का थोड़ी
हम ने वो वा'दा पाला था
तुम को अपना ही ग़म दिखता
तुम ने कब से सँभाला था
जज़्बा मानो खो ही बैठा
जो माना तुम को माना था
साहस संयम सब कुछ मैं ने
तुझ को ही पहना डाला था
— sahllucknowi















