तेरी ही इन आँखों का काजल हूँ बना
धरती बनी हो जब तो बादल हूँ बना
सब को दिखा सकती हो तुम आसानी से
देखो वही प्यारी सी पायल हूँ बना
मन कब से तालिब सा हुआ बैठा यहाँ
कोशिश बड़ी की तब ये आँचल हूँ बना
शायद कभी समझा न पाया ढंग से
दिल से तभी आधा ही पागल हूँ बना
रहबर ज़रा ख़ुद गुम यहाँ लगता ‘अनुज’
मजबूर हो के ही हलाहल हूँ बना
— sahllucknowi















