मेरा इस तरह तू भला कर गया
मेरे दिल के ग़म की दवा कर गया
न जाने गिरा दिल में क्या दोस्तों
कोई फिर से आँसू बहाकर गया
मकीं था जो दिल में बुलाओ उसे
जो हर बात दिल में छुपा कर गया
दिखाऊँ मैं क्या दर्द अपना तुझे
मुझे हिज्र तेरा फ़ना कर गया
जहाँ एक फंदा लगा है नया
वहीं पैर अपना फँसा कर गया
कहानी वफ़ा की अधूरी रही
यूँॅं ही बस वो बातें बना कर गया
— Zohair Ahmad Sahil















