KHud ko hardam sahi samjhti hai | ख़ुद को हरदम सही समझती है

  - 100rav

ख़ुद को हरदम सही समझती है
हँसने को फिर हँसी समझती है

लिखता हूँ बात दिल की मैं और वो
बात को शाइरी समझती है

दरिया पे बस पियासा आता है
वो मुझे बस वही समझती है

डूब कर आशिक़ी बताऊँगा 'इश्क़ की आशिक़ी समझती है

ज़िंदगी मैं जिसे समझता हूँ
ग़ैर को ज़िंदगी समझती है

मैं दिखूँ तो चिपकती है उसको
वो मुझे छिपकली समझती है

कहने को दोस्त हूँ ना मैं तेरा
सच बता दोस्ती समझती है

हाल मत पूछना तू सौरभ का
जीते जी ख़ुदकुशी समझती है

  - 100rav

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