है तेरे इश्क़ की ये ओढ़नी जो दिल ने पहनी हैन नज़रें फेर मुझ से तू जुदाई अब न सहनी हैले चाहे रूप कितने पर न बदलेगा कभी ये सचकी हर इक रूप श्री ही संग नारायण के रहनी है— Abha sethi