सुहानी सी फ़ज़ा है लौट आओ
भुला दो जो हुआ है लौट आओ
हमारी मंज़िलें भी एक हैं और
यही एक रास्ता है लौट आओ
गए हैं छोड़कर हम को कई पर
फ़क़त तुम से कहा है लौट आओ
गई थी जनवरी में छोड़कर तुम
दिसंबर आ गया है लौट आओ
तुम्हें देखा नहीं है साल भर से
बहुत मन कर रहा है लौट आओ
— Abhinav srivastava















