मुझे अब किसी से मोहब्बत नहीं है
तेरे साथ जैसी इनायत नहीं है
न मैंने गुलाबों की ता'रीफ़ की है
तेरे रुख़ सी इन
में नज़ाकत नहीं है
मुझे मिल गए तुम तो सब मिल गया है
मुझे ज़िंदगी से शिकायत नहीं है
मोहब्बत हुई है मुझे जब भी तुम से
कहीं दिल लगाने की चाहत नहीं है
जिसे दिल से चाहो ख़ुदा तुम बना लो
कोई इस से बढ़ कर इबादत नहीं है
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