hona to chahiye tha asar par nahin hua | होना तो चाहिए था असर पर नहीं हुआ

  - Ajay Choubey

होना तो चाहिए था असर पर नहीं हुआ
दिल टूटने के बाद भी पत्थर नहीं हुआ

उसको था शौक़ रोज़ नए ज़ेवरों का सो
मैं उसके जिस्म का कोई ज़ेवर नहीं हुआ

दुनिया के ज़ुल्म और सितम का है ये असर
याँ शौक़ शौक़ में कोई शायर नहीं हुआ

बंदर बना रहा जो मदारी के खेल का
जंगल उसे कभी भी मुयस्सर नहीं हुआ

इस शहर में हमेशा तरक़्क़ी मिली मुझे
लेकिन ये शहर मेरा कभी घर नहीं हुआ

इस बात से हूँ ख़ुश कि मोहब्बत की राह में
गौहर न हो सका तो मैं पत्थर नहीं हुआ

  - Ajay Choubey

Inquilab Shayari

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