बिना तेरे मिला मुझको भला किस बात का जीवन
बिना तेरे जिया मैंने कहाँ दिन रात का जीवन
मिली मुझको हवा तो सर उठाकर लहलहाता था
कहाँ मुझको पता था धूल है हर पात का जीवन
किसी ने दुख दिया मुझको तड़प सहती रहीं आँखें
मुझे फिर याद आया वो भरी बरसात का जीवन
नगर में जब मरा तेरे दिखा कंधा नहीं कोई
नगर की बेबसी से था भला देहात का जीवन
वतन की बात हो जब भी कटा के शीश आना तुम
नहीं मतलब मिला जो गर कभी ख़ैरात का जीवन
बड़ा मजबूर जीवन था 'अजय' का हाल मत पूछो
जिया करता रहा जैसे किसी बद-ज़ात का जीवन
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