आप जाने की ज़िद जो करते हैं
ख़्वाब अपने सभी बिखरते हैं
आसमाँ सूरजों से रौशन है
और हम जुगनुओं पे मरते हैं
आपका मुस्कुराना काफ़ी है
आप बेकार ही सँवरते हैं
हर किसी को किसी ने मारा है
लोग कब हादसों में मरते हैं
आप क्या ग़म हमारा समझेंगे
आप तो वाह वाह करते हैं
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