होना तो चाहिए था असर पर नहीं हुआ
दिल टूटने के बाद भी पत्थर नहीं हुआ
उसको था शौक़ रोज़ नए ज़ेवरों का सो
मैं उसके जिस्म का कोई ज़ेवर नहीं हुआ
दुनिया के ज़ुल्म और सितम का है ये असर
याँ शौक़ शौक़ में कोई शायर नहीं हुआ
बंदर बना रहा जो मदारी के खेल का
जंगल उसे कभी भी मुयस्सर नहीं हुआ
इस शहर में हमेशा तरक़्क़ी मिली मुझे
लेकिन ये शहर मेरा कभी घर नहीं हुआ
इस बात से हूँ ख़ुश कि मोहब्बत की राह में
गौहर न हो सका तो मैं पत्थर नहीं हुआ
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