ख़्वाब जो भी थे जल गए हैं ना
मेरे आँसू पिघल गए हैं ना
मेरे अरमान, मेरे ख़्वाबों को
बे-सबब ही कुचल गए हैं ना
आप के वास्ते जहाँ छोड़ा
आप हम से बहल गए हैं ना
हम मुहब्बत में फँस गए केवल
आप बचकर निकल गए हैं ना
आपसे इश्क़ था हमें लेकिन
आप हम को भी छल गए हैं ना
पहले हम कितना मुस्कुराते थे
हम भी कितना बदल गए हैं ना
— Akash Rajpoot















