कोई छुप कर बदलता है कोई कह कर बदलता है

भरोसा कीजिए जिस पर वही अक्सर बदलता है

बदलने को तो दुनिया में बदलते हैं सभी लेकिन
तजुर्बा है उसे वो शख़्स कुछ बेहतर बदलता है

कमाई झोंक दी अपने पसीने-ख़ून की जिस
में
वही बेटा पिता के सामने तेवर बदलता है

इधर बेचैन हूँ मैं भी तबीअत से उधर वो भी
कभी तकिया कभी करवट कभी बिस्तर बदलता है

मुहल्ले में कोई लड़की सुना है रहने आई है
सुना आकाश कपड़े आजकल दिन भर बदलता है

— Akash Rajpoot

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